रायगढ़। धान खरीदी उत्सव का शुक्रवार को समापन हो गया। जिले में करीब 47.76 लाख क्विंटल धान का उपार्जन किया गया है जो पिछले साल की तुलना में तीन लाख क्विं. कम है। इस बार धान विक्रय करने वाले किसानों की संख्या भी कम हुई है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने धान खरीदी को बेहद गंभीरता से लिया और कोचियों को रोकने के लिए ठोस रणनीति के तहत काम किया। वास्तविक किसानों का धान उस क्षेत्र की औसत अनावरी के हिसाब से खरीदा गया। बड़े किसानों को अंतिम दिनों में दिक्कत हुई क्योंकि उनके पास ज्यादा मात्रा में धान था।इतनी सख्ती के बीच धान खरीदी होने की वजह से कमी तो आनी ही थी।
अंतिम दिन 74,828 क्विंटल के टोकन जारी किए गए थे जिसके विरुद्ध 67,242 क्विंटल की खरीदी हुई। इस सीजन में इस बार 72634 किसानों ने 47,76,690 क्विंटल धान बेचा है। पिछले साल 24-25 में कुल 73295 किसानों ने 50,87,976 क्विंटल धान विक्रय किया था। मतलब इस बार किसान संख्या भी कम हुई और धान की मात्रा में भी तीन लाख क्विंटल की कमी आई है। कुल 83641 किसानों में से करीब 11 हजार किसान शेष रह गए। इससे ज्यादा किसान पिछले साल धान बेचने नहीं पहुंचे।
आज होगा भौतिक सत्यापन
इस बार धान खरीदी में गड़बड़ी रोकने के लिए समितियों से उठाव ही नहीं करवाया गया। धान की रीसायक्लिंग रोकने में यह कदम कारगर रहा। 31 जनवरी को सभी जिला नोडल और समिति नोडल को भौतिक सत्यापन करने का आदेश दिया गया है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक स्टेक में बोरों की संख्या मोटा और सरना धान के हिसाब से दर्ज करने को कहा गया है। इसके बाद उठाव किए गए धान के साथ जोडक़र कुल खरीदी से मिलान किया जाएगा। जहां भी गड़बड़ी होगी, पता चल जाएगा।
