रायगढ़ । धान खरीदी प्रारंभ होते ही बोगस खरीदी भी शुरू हो गई है। घोटाले के लिए कुख्यात सारंगढ़ ब्लॉक इस बार भी सबसे आगे रहेगा। कोसीर समिति के रक्सा उपार्जन केंद्र में बोगस खरीदी को लेकर बवाल मच गया। भाजपा नेताओं की शिकायत पर प्रशासनिक टीम जांच करने पहुंची। बताया जा रहा है कि समिति में करीब 40 क्विंटल धान कम मिला है। सारंगढ़ की कई समितियां बोगस खरीदी में पारंगत हैं। रायगढ़ जिले में तो दागी प्रबंधकों को हटाकर सुधार करने का प्रयास किया गया, लेकिन सारंगढ़ में कलेक्टर ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। उसी का नतीजा है कि धान खरीदी के 15 दिनों में ही बोगस खरीदी का भांडा फूटा है।
कोसीर समिति के उपार्जन केंद्र रक्सा में धान बिना लाए सॉफ्टवेयर में चढ़ा दिया गया। भाजपा नेताओं की शिकायत पर तहसीलदार मनीष सूर्यवंशी, अपेक्स बैंक के नोडल, खाद्य निरीक्षक आदि ने संयुक्त जांच की। भौतिक सत्यापन में पता चला कि करीब 40 क्विंटल धान कम है। यह धान मुड़वाभांठा के किसान के नाम पर चढ़ा है लेकिन वास्तविक रूप से धान लाया ही नहीं गया। टोकन जरूर काटा गया था लेकिन धान नहीं मिला। मतलब साफ है कि पुराने प्रबंधकों, फड़ प्रभारियों और ऑपरेटरों की मनमानी से सरकार को नुकसान पहुंचाने का खेल जारी है।
बारदाना प्रभारी, आवक प्रभारी और हमालों के बयान से यह बात साबित भी हुई। बारदाना प्रभारी पंकज विष्णु भारद्वाज और आवक प्रभार सुरेश भारद्वाज का कहना है कि फड़ प्रभारी पुकराम मनहर के कहने पर बिना धान लाए खरीदी दिखाई गई है। हमालों का कहना है कि मंगलवार को सुरेंद्र पिता लक्ष्मण, श्रीकांत पिता लक्ष्मण और थीरबाई के नाम से 187 बोरा (75 क्विं.) धान खरीदी की गई। लेकिन सुरेंद्र 368 बोरी धान लाया था जिसमें से बचे हुए 181 बोरी (72 क्विं.) को बुधवार को दूसरे के नाम पर चढ़ाया गया, लेकिन गुरुवार रात हुई जांच में रक्सा केंद्र में करीब 40 क्विं. धान कम पाए जाने की सूचना मिल रही है। मतलब बोगस खरीदी हुई है।नहीं कर पा रहे नियंत्रण
सारंगढ़ ब्लॉक में आठ ऐसी समितियां हैं जहां बोगस खरीदी होती है। सालों से जमे हुए प्रबंधक, फड़ प्रभारी और ऑपरेटरों ने वहां अपनी हुकूमत बना ली है। बोगस खरीदी को खुलकर संरक्षण दिया जाता है। अभी भी यही हाल है। न तो अपेक्स बैंक ने नियंत्रण किया और न ही मार्कफेड कुछ कर पाया। प्रशासन अब भी सारंगढ़ में बोगस खरीदी को मूकदर्शक बनकर देख रहा है। लोन घोटाले में भी अपेक्स बैंक ने कोई कार्रवाई नहीं की। गबन की राशि वसूली तो दूर, जांच तक नहीं कर सके हैं।
